इस गांव में डोली उठाना मना है, 15 साल से नहीं उठी डोली , गुना के आरोन तहसील क्षेत्र का कुसमान गांव आज भी रूढ़िवादिता व अंधविश्वास की जकड़ में होने से ग्रामीण अपनी बेटियों की डोली अपने घर से नहीं, बल्कि दूसरे गांव या तहसील मुख्यालय पहुंचकर उठाते हैं। इसके पीछे ग्रामीणों का तर्क है कि करीब 15 साल पहले दो भाइयों के आपसी विवाद में एक की हत्या हो गई थी, तभी से इस गांव में बेटियों की शादी करना अपशगुन माना जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि गांव से बेटी की डोली उठाई, तो उनके परिवार व बेटी के परिवार के साथ कुछ अनर्थ हो सकता है। हालांकि, गांव में बेटों की शादियां बदस्तूर जारी हैं।

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घटना के अनुसार करीब 15 साल पहले सगे दो भाइयों के बीच खेती के विवाद को लेकर झगड़ा हो गया था। इस झगड़े में मृतक शिशुपाल पुत्र बारेलाल की हत्या उसके ही सगे भाई विशन पुत्र बारेलाल ने कर दी थी। विशन वर्तमान में जेल की सजा काट रहा है। आरोन तहसील के ही करीब आधा दर्जन गांव आज भी ऐसे हैं, जहां किसी न किसी कारण गांव में बेटियों की डोली नहीं उठाई जाती है।

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गांव के बुजुर्गों के मुताबिक वर्ष 2003 में गांव में दो सगे भाई आपस में झगड़ पड़े और इस घटना में एक व्यक्ति की हत्या हो गई थी। इसके बाद से ही गांव से बेटियों की डोली उठना बंद हो गई। गांव के वरिष्ठ नागरिक जगन्नाथसिंह यादव, जीवनसिंह यादव व अन्य ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या का समाधान वही परिवार कर सकता है, जिसने गांव में हत्या की थी। यदि हत्या करने वाला परिवार अपनी बेटियों की शादी गांव से करे, तो गांव में एक बार फिर से डोली उठनी शुरू हो सकती है।

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इनमें कुसमान के अलावा रामगिर कला, झांझोन, भादौर आदि प्रमुख रूप से हैं, जहां यदि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी रुचि लें, तो ग्रामीणों को अंधविश्वासों से मुक्ति मिल सकती है। कुसमान पंचायत की सरपंच राममूर्तिबाई ने इस रूढ़िवादिता को समाप्त करने के लिए जनप्रतिनिधियों तथा जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही है, ताकि गांव में एक बार फिर से डोलियां उठाई जा सकें। क्योंकि, अंधविश्वास के चलते ग्रामीणों को बेटियों की शादी दूसरे गांव से करना पड़ती है, तो पैसों की भी बर्बादी होती है।

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