कहते हैं हुनर किसी का मोहताज नहीं होता। सड़क पर भीख मांगने वाले लोगों से अक्सर ही लोग कहते हैं कि जब भगवान ने हाथ पैर दिए हैं तो भीख क्यों मांग रहे हो? जाओ कुछ कमा के खाओ। वहीं अगर दूसरी तरफ़ हमें कोई दिव्यांग दिख जाता है तो हम चुप रह जाते हैं। और कहें भी क्या। लेकिन कहीं न कहीं झल्लाते हम उन लोगों से भी हैं।

लेकिन अगर कोई दिव्यांग आपको कोई काम करता हुआ दिख जाता है तो आपको हैरानी भी होती है और ख़ुशी भी। ऐसा ही नज़ारा जोइस को भी देखने को मिला। वो ऋषिकेश में थीं और उन्होंने देखा कि एक महिला जिसके दोनों हाथ नहीं हैं। अपने पैरों से पेन पकड़कर कुछ लिखने की कोशिश कर रही है और अपने आस-पास से गुज़रते लोगों भीख मांग रही है। जोइस उसके करीब गईं और उन्होंने देखा कि उस महिला ने बड़ी तल्लीनता से कागज़ के एक टुकड़े पर राम लिखा है। उस महिला का नाम है अंजना मलिक। जोइस एक आर्टिस्ट और योग की टीचर हैं और यूएस में रहती हैं। उन्होंने अगले दिन अंजना को वॉटर कलर और ड्राइंग शीट दी।

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जोइस बताती हैं कि कुछ ही दिनों में अंजना ने बहुत अच्छी पेंटिंग बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने सबसे पहले भगवान गणेश की तस्वीर बनाई थी। अंजना का जीवन कभी आसान नहीं रहा। उन्होंने पांचवी कक्षा में ही स्कूल छोड़ दिया था और वो खुद को परिवार पर एक बोझ के रूप में देखती थीं। अंजना के बड़े भाई ने आत्महत्या कर ली थी जिसके बाद से घर की माली हालत काफ़ी खराब हो गई। लेकिन अब अंजना की बनाई हुई पेंटिंग लोग खरीदने लगे हैं। उनकी एक पेंटिंग 2,500-25,000 रुपए में बिक जाती हैं। हालांकि उनके ज़्यादातर ग्राहक विदेशी होते हैं।

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अंजना कहती हैं कि जोइस से मिलने के बाद उनकी ज़िंदगी पूरी तरह से बदल गई है। अब वो एक सम्मानित ज़िंदगी जी रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक मदद भी कर पा रही हैं। अनजाना का ये हौसला देखकर ख़ुशी के साथ-साथ काफ़ी हैरानी भी होती है। उम्मीद है कि विदेशियों की तरह ही हम भारतीय भी अंजना और उनकी तरह के दूसरे लोगों के हुनर का सम्मान करेंगे और उनकी हिम्मत को सराहेंगे।

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